बढ सकता है तो बढA Poem by Bittu kumar sohan
तू बढ सकता है तो तारकों की तरफ़ बढ |
उट तो देख अपने ™क्ष्य को , तेरि तरफ़ बढ रहि है वो , तू भी बढ| तू बढ सकता एच तो तारकों की तरफ़ बड| सम्भ™ उठ ,देख जरा अपने आपको | ये आसमान भी रास्ता दे रहि है तुझे | इसी रास्ते से जाना है आ-े तुझे | इस रास्ते को तू -ढ तू बढ सकता है तो तारकों की तरफ़ बढ| काट दे तू उन काँटों को | जो आये तेरे रास्ते मे| उखाड़ फेंक उन जड़ो को | जो शत्रु है तेरे रास्ते मे| ध्यान न दे इन पर, तु बस उपर चढ| तू बढ सकता है तो तारकों की तरफ़ बढ| देर न कर ,उठा ™े, तू इसे जो तेरे श्रम का फ™ है || देख इसकी दीप्ती को | जो तेरे श्रम का प्रतीक है | तू बढ सकता है तो तारकों की तरफ़ बढ| © 2015 Bittu kumar sohan |
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2 Reviews Added on June 2, 2015 Last Updated on June 2, 2015 AuthorBittu kumar sohanSitamarhi, Bihar, IndiaAboutI am a student of class nineth. . But i write poem. Stories.essay. ,In hindi more.. |

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