गु™ाबA Poem by Raj Swamiमेरी कविता हाँ मैं गु™ाब हूँ वही गु™ाब जो सौंप देता है अपने आप को हर किसी के हाथ में खुद टूटकर
हाँ मैं -ु™ाब हूँ
वही -ु™ाब जो सौंप देता है अपने आप को हर किसी के हाथ में खुद टूटकर करवाता है इश्क मुकम्म™ राज स्वामी © 2018 Raj Swami |
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Added on April 25, 2018 Last Updated on April 25, 2018 |

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