आज़ाद हूँ ||A Poem by Vartika
बेशक़ तुम अज़ीज़ हो
हर्फ़-दर-हर्फ़ मेरे पन्नों पर थिरकती हो वस्™ का सुकून ना सही तुम मेरी ख्वाहिशों की इफ्तारक में भी शरीक हो बेशक मैं एक फ़कीर हूँ खुमार-ऐ--म का अमीर हूँ हर रंजीदा ग़ज़™ की फ़रियाद हूँ बेशक तुम्हारी दम कशी में रहकर भी आज़ाद हूँ उस तिरं-े की तरह बस आज़ाद हूँ। :-vartika © 2019 Vartika |
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Added on April 10, 2019 Last Updated on April 10, 2019 |

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