मैं और तूA Poem by Anshuman Aryavमैं शब्द, तू अर्थ है,
मैं तन, तू मन है, मैं प्राण, तू ज्ञान है, मैं -ीत, तू सं-ीत है, मैं दवा, तू दुआ है, मैं चित्र, तू चरित्र है, तू धूप में छाव है, मैं भाषा, तू भाव है, तेरे बिना मैं अधूरा हूँ, तू है तो मैं पूरा हूँ, तू प्रेरणा है मेरी "र तू सब कुछ है, तू अँधेरे में ज्ञान का दीपक है, तू ही मेरी ज़िन्द-ी का ™ेखक है, मेरी ज़िन्द-ी तुझपे ख़त्म, तुझसे ही शुरु है, क्योंकि 'मैं' हूँ शिष्य 'तू' -ुरु है क्योंकि 'मैं' हूँ शिष्य 'तू' -ुरु है © 2017 Anshuman AryavReviews
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4 Reviews Added on August 8, 2017 Last Updated on August 8, 2017 |

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